Friday, February 15, 2008

शेयर बज़ार में ज़फ़र


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

फलता नहीं है धन मेरा डूबे हुए बज़ार में
किसका पोर्टफ़ोलिओ बचा है इस उतार में

कह दो आयकर वालों से कहीं और करे कर वसूल
मेरे घर का तो खर्च चलता है उधार में
फलता नहीं है ...

पेट काट काट के खरीदे थे चार कम्पनीयों के शेयर
दो टी-वी पर डाउनग्रेड हो गए दो अखबार में
फलता नहीं है …

कितना है बदनसीब राहुल कि खरीदे हुए
साठ के शेयर बिकते हैं तीन-चार में
फलता नहीं है …

(बहादुर शाह ज़फ़र से क्षमायाचना सहित)

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