Sunday, January 1, 2017

बस इतनी सी मेरी प्रार्थना

देने को तो दे ही चुके हैं

सब देनेवाले सुख-समृद्धि तुम्हें 

किस बात की है अब कमी तुम्हें 

किस बात की है तुम्हें चाह, प्रिये


लोहड़ी-संक्रान्ति-वसन्त पंचमी

होली-राम नवमी-जन्माष्टमी 

ऋद्धि-सिद्धि-दीप-दीपोत्सव

हैलोवीन-थैंक्सगिविंग-क्रिसमस ईव


सब सफल हों, सब सहर्ष हों

सबमें रचें-बसें कर्णप्रिय गीत, प्रिये


जब भी चाहो, ख़ुद को पाओ

ख़ुद से ना तुम दूर रहो

मिथ्या-ईर्ष्या-बैरी-शत्रुता

इनकी कभी कोई छाँह पड़े


बस इतनी सी मेरी प्रार्थना 

झोली में नहीं कुछ ख़ास, प्रिये


देने को तो दे ही चुके हैं ...


1 जनवरी 2017

सिएटल | 425-445-0827

tinyurl.com/rahulpoems 



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